नया आविष्कार

वैज्ञानिक कैसे बना"



लेखक: श्री अयान कबीर

बहुत समय पहले की बात है...
एक व्यक्ति था, जिसने पहली बार इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, और न्यूट्रॉन जैसे अद्भुत कणों की खोज की थी।

लेकिन उसके सामने सबसे बड़ा प्रश्न था —
"इनका उपयोग कैसे करूँ? कहाँ करूँ? और किस उद्देश्य के लिए करूँ?"

वह व्यक्ति बहुत परेशान रहने लगा।
दिमाग में लगातार उलझनें, तनाव, सोच-सोचकर थक गया था।
ना किसी से बात कर पा रहा था, ना खुद को समझा पा रहा था।

तभी एक दिन उसके कुछ पुराने दोस्तों ने उसे अपने घर एक पार्टी में बुलाया।

अब पार्टी तो बस 25–30 लोगों के लिए रखी गई थी, लेकिन बुला लिए गए 50 से भी ज़्यादा लोग।
घर में भीड़, शोर-शराबा, हंगामा —
माहौल बहुत ही अस्त-व्यस्त हो गया।
उसे यह सब बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था।

लेकिन तभी...
जब पार्टी में 10 लड़कियाँ आईं — तो पूरे माहौल में जैसे चमत्कार हो गया।
हर कोई शांत हो गया।
लड़के एक-दूसरे के सामने अकड़ने लगे, स्मार्ट दिखने लगे।
अब शोर कम था, और माहौल में एक अजीब सी शांति थी — जो उसे बहुत पसंद आई।

अब वह भी पार्टी का आनंद लेने लगा।
पर कुछ समय बाद, 15–20 और लड़के आ पहुँचे — और वही पुराना शोर फिर से शुरू हो गया।

लड़के अब लड़कियों के पीछे पड़ गए, बात-बात पर लड़ाई, जलन, दिखावा।
और माहौल फिर से अशांत हो गया।

इसके बाद, कुछ और लोग भी आए —
न ही पूरी तरह लड़के थे, न ही लड़कियाँ —
वह अलग ही किस्म की ऊर्जा लिए हुए थे।

अब तो पार्टी पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी थी —
शोर, झगड़े, मारपीट —
उसे ऐसा लगने लगा कि अब ये घर टूट ही जाएगा।
पार्टी अब पूरी तरह बर्बाद होने वाली है।

गुस्से और परेशानी में वह व्यक्ति घर से बाहर निकल आया।
एक सिगरेट जलाई... और अकेले बैठकर सोचने लगा।

तभी उसके दिमाग में एक बिजली सी कौंधी —

“जो अभी-अभी पार्टी में हुआ, वो मेरे दिमाग के उस प्रयोग जैसा ही तो है…”

वह सोचने लगा —
यदि मैं इलेक्ट्रॉन (लड़कियाँ), प्रोटॉन (लड़के) और न्यूट्रॉन (तीसरे लिंग) को सही अनुपात में मिलाकर, संतुलन के साथ इस्तेमाल करूँ, तो शायद कुछ विशाल और शक्तिशाली चीज़ बन सकती है।

और फिर...
उसी सोच के आधार पर उसने दुनिया का पहला परमाणु बम (Atom Bomb) बना डाला।


---

इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?

भगवान खुद आकर हमें किसी खोज का रास्ता नहीं दिखाएंगे।
हमें खुद ही अपनी सोच, पर्यावरण, और समाज की गतिविधियों का गहराई से अवलोकन करना होगा।

जो व्यक्ति देख सकता है, सोच सकता है, और समझ सकता है —
उसी के पास होती है आविष्कार की चाबी।

हर खोज आपके आसपास छुपी हुई होती है —
बस ज़रूरत होती है — उसे देखने वाली आँखों की।

~ श्री अयान कबीर

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